मतदाताओं की खामोशी से पलामू लोकसभा में कौन किस पर कितना भारी आकलन करना हुआ मुश्किल

पलामू लोकसभा चुनाव के मतदान की 29 अप्रैल की तिथि करीब आ चुकी है बावजूद मतदाता खामोश है प्रत्याशी व उनके समर्थकों को मतदाता निराश नहीं कर रहे हैं जो भी वोट मांगने समझाने मतदाताओं के दरवाजे तक दस्तक दे रहा है उसे वोट देने के लिए आश्वासन देने में आम मतदाता पीछे नहीं रह रहा है मगर वोट उसे किसे करना है यह बात वह अपने मन में ही रख रहा है लिहाजा पलामू लोकसभा चुनाव क्षेत्र में किसका पलड़ा भारी है इसका आकलन कर पाना आसान नहीं है मतदाता की जागरूकता कहें अथवा उनकी चतुराई मन में किसे वोट देना है यह डिसाइड है मगर जुबान है जो प्रत्याशियों व समर्थकों के सामने उन्हें खुश करने के लिहाज से खुलता है मगर आम आदमी यदि उसके उनके मन को टटोले तो कुछ भी बोलने से पूरी तरह से मतदाता कतरा रहे हैं ऐसे में पलामू संसदीय क्षेत्र में महा गठबंधन के प्रत्याशी व एनडीए के प्रत्याशी के बीच आमने सामने की लड़ाई में कौन कितना पानी में है फिलहाल थाह लगाना मुश्किल है जहां तक समर्थकों का प्रश्न है भाजपा खेमे में भी बीडी राम की जीत के प्रति अस्वस्था झलक रही है तो महा गठबंधन के प्रत्याशी के राजद के खेमे में भी चुनाव जीतने का उत्साह से कार्यकर्ता लबरेज है जहां तक मतदाताओं का रुझान का प्रश्न है पिछले चुनाव से इस बार के चुनाव में काफी अंतरदिख रहा है मतदाता अपने अपने हिसाब से प्रत्याशियों के चयन में जाति तथा धर्म के हिसाब से गुणा भाग करते देखे जा रहे हैं मगर पसंद कौन है कौन नहीं इसकी समीक्षा खुलकर नहीं करने से पलामू संसदीय क्षेत्र में चुनावी आकलन करना फिलहाल कठिन लग रहा है l AYUSH TIWARI

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