दीपावली के अवसर पर नहीं छोड़ेंगे पटाखे लिया शपथ
ज्ञान निकेतन कान्वेंट स्कूल में "नो टू क्रेकर्स"(पटाखे नहीं छोड़ने)पर शपथ कार्यक्रम एवं बाल जागरूकता किया गया
इस मौके पर निर्देशक मदन प्रसाद केशरी ने कहा कि दीपावली खुशियों का पर्व है, सुख -शांति का पर्व है। दीपावली खुशियों का त्योहार है यह किसी का दुःख का कारण न बने, इसके लिए पटाखों से खाश तौर पर परहेज होनी चाहिए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार दिल्ली में पटाखों के कारण दीवाली के बाद वायु प्रदूषण छ: से दस गुना बढ़ गया है । तेज़ आवाज वाले पटाखों का सबसे ज्यादा बुरा असर बच्चो , गर्भवती महिलाओं , बुजुर्गो के साथ-साथ दिल और सांस के मरीजों पर पड़ता है । पटाखों में कम से कम सतरह रसायन मिलाये जाते है जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत ही हानिकारक हैं। पर्यावरण विदों का मानना है कि एक लाख कारों के धुंए से जितना नुकसान पर्यावरण को होता है उतना नुकसान बीस मिनट के आतिश-बाजी से हो जाता है । शोर का मानक स्तर दिन में पचपन तथा रात में पैतालिश डेसिबल तक पहुंच जाता है जिसके दुष्परिणाम स्वरूप हम स्थायी रूप से बहरापन का शिकार हो सकते है । इसका प्रयोग सबसे ज्यादा बच्चे करते हैं जिससे उनके सेहत पर गहरा प्रभाव पड़ता है । मिट्टी से बने दीप जलाएं दीपउत्सव मनाये तथा चीन निर्मित वस्तुओं को त्याग कर स्वदेशी वस्तुओ को अपनाएं ।
अपने संबोधन में विद्यालय के प्राचार्य बसंत ठाकुर ने कहा कि भारतीय संस्कृति में दीपों का त्योहार दीवाली, घरो को दीपों से जगमग करने वाला पर्व है जो हमे अंधकार से प्रकाश के तरफ अग्रसर होने के लिए प्रेरित करता है ।
कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षक विनय दुबे, उदय प्रकाश, आसिफ अली, मनोज कुमार, जय प्रकाश, मुकेश भारती, नरेंद्र सिंहा, नियामत अंसारी, सत्य प्रकाश, अनूपा, रिज़वाना, सरिता, नीलम, आफरीन, इरम, सोम्या, दिव्या, नीरा शर्मा, संतोष प्रसाद की भूमिका सरहानीय रही ।


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