बाबा सोमनाथ मन्दिर परिसर में प्रवचन जारी
गढ़वा
इस संसार में यदि मनुष्य सुख की इच्छा करता है तो उस व्यक्ति को भगवान के परम पावन चरणो का आश्रय लेना होगा। उक्त बातें शहर के सहिजना स्थित बाबा सोमनाथ मन्दिर में दुर्गा पूजा के अवसर पर आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ कथा का प्रवचन करते हुए वृन्दावन से आए परमपूज्य महाराज अरुण कृष्ण शास्त्री ने कही।
महाराज अरुण कृष्ण ने चार श्लोकी भागवत पुराण का निरुपण करते हुए माया के अर्थ की व्याख्या की। उन्होने कहा कि मा का अर्थ ‘नही‘ तथा या का अर्थ ‘जो‘ अर्थात जो नही फिर भी हमें सत्य प्रतित होता है। इस प्रसंग की उन्होने वृहद व्याख्या की। कहा कि इस संसार का नाम दुःखालय है। इस संसार में कोई सुखी नही हो सकता क्योंकि इस संसार में सुख है ही नही। सिर्फ सुख का भ्रम है। यदि मनुष्य सुख की इच्छा करता है तो उस व्यक्ति को भगवान के परम पावन चरणो में आश्रय लेना चाहिए। परमपूज्य महाराज ने कहा कि अन्याय पूर्वक प्राप्त किया हुआ धन अल्प समय तक रहता है। वही जब वह धन धन जाने लगता है तो ब्याज सहित लेकर चला जाता है। इसलिए व्यक्ति को धर्म की मार्यादा में ही धन का अर्जन करना चाहिए जिससे आहार, व्यवहार, विचार शुद्ध होंगे और समाज में सुख, शान्ति और संवृद्धि आएगी। उन्होने मातृत्व शक्ति की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान भी पृथ्वी पर यदि आए तो मां के गर्भ में आना पड़ा। इसलिए मां का पद सर्वोच्च माना गया है। उन्होने कहा कि शास्त्रो में हमारे समाज के चरित्र निर्माण करने में माताओं का प्रथम योगदान है। इस अवसर पर भक्ति भाव से भरे कई सुमधुर गीतों का भी प्रस्तुतिकरण किया गया। मौके पर वार्ड पार्षद सत्यवती देवी, अनिल सिंह, उमेश सिंह, भुनेस्वर सिंह, अखिलेश तिवारी समेंत बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित थे।


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