पलामू लोकसभा भाग --5


 
मोदी  लहर में 2014 में एक दषक बाद पलामू  में हुइ है भाजपा की वापसी 
गढवा : पलामू लोक सभा चुनाव क्षेत्र से 1989 में कमलाकुमारी की जनता दल के जोरावर राम के हांथो पराजय के बाद जो कॉग्रेस के विदाइ हुई वह ऐसी विदाइ थी कि इसके बाद आठ - आठ मर्तबा इस संसदीय चूनाव क्षेत्र में चुनाव हुए मगर कॉग्रेस का पलामू मे लोक सभा के लिहाज से ऐसा पांव उखड़ा कि दुबारे चुनाव जितने की बात तो दुर पिछले कइ चुनव से राष्ट्रीय दल होकर भी क्षेत्रीय दलों के आगे घुटने टेक कर , अब इस चुनाव मैदान से एक तरह से काुूग्रेस बाहर होकर पिछलगु रजनीतिक दल की भूमिका निभाने को मजबुर  हो गयी हे । कॉग्रेस के दिन लदते ही इस चुनाव क्षेत्र में बीपी सिंह के सरकार गिरने के बाद हुए मध्यअवधि चुनाव में भाजपा के रामदेव राम ने 1991 में कमल खिलाकर ऐसा झंडा भजपा के लिए गाड़ा कि लगातार इस क्षेत्र से भाजपा के ब्रजमोहन राम सांसद तीन मर्तबा 1996, 1998, तथा 1999 में कमल फुल निषन पर  सांसद बनें। ब्रजमोहन राम पलामू से सर्वाधिक समय तक सांसद बनने वालों मे  कॉग्रेस  की कमला कुमारी के बाद दूसरे नम्बर हैं जिन्होंने सर्वाधिक समय करीब नौ बर्ष तक तीन - तीन बार सांसद बनने का किर्तीमान बनाया। 2004 के चुनाव भाजपा प्रत्याषी बंजमोहन राम के लिए ही नही  भाजपा के लिए भी ऐसा अभिषाप बना कि कॉग्रेस की ही तरह भाजपा भी पलामू लोकसभा चूनाव क्षेत्र से बेदखल  गयी क्योंकि राजद के मनोज कुमार से 2004 का चुनाव हारने के बाद क्योचन फोर कैष मामले में मनोज को सदस्यता अवष्य गंवानी पड़ी पर उप चुनाव में भी भाजपा को मुहं की खानी पड़ी तथा 2006 के उपचुनाव में राजद के ही प्रत्याषी  घूरन राम ने चुनाव जीत जितकर इस ंसदीय क्षेत्र पर राजद का कब्जा बरकार रखा, मगर 2009 के आमचुनाव में नक्सली नेता कामेष्वर बैठा ने चुनाव जीतकर जेएमएम जैसे दल के लिए भी पलामू लोकसभा से सांसद बनने का सपना ऐसा साकार किया  जो असंभव सा था, क्योकि नक्सली कमांडर की यह चमत्कारी जीत थी , खाषकर झामुमो के सिम्बल के लिहाज से क्योकि  इस संसदीय क्षेत्र में झामुमो का कोइ राजनीतिक हैषियत नही था।  तात्पर्य यह कि 2004 से पलामू लोकसभा से बेदखल हुइ राष्ट्रीय पार्टियों के सामने इस सीट पर दुबारे चुनाव जितना एक बड़ी चुनौती बन सी गयी थी । मगर मोदी लहर में सम्पन्न हुए  2014 के चुनाव में भाजपा के प्रत्याषी बने झारखंड के पूर्व डीजीपी बीडी राम ने रिकार्ड मत से चुनाव जीतकर इस संसदीय क्षेत्र पर करीब दस साल के बनवास के बाद भाजपा की वापसी कराकर समाप्त तो करा  दिया है। मगर देखने होगा कि आनेवाले चुनाव मे क्या होगा 
                                                  जारी  

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