11-बसपा से रधुराइ गन्नौरी तो जेभीएम से प्रभात भी है लोकसभा के चुनावी मैदान में उतरने को बेताब
गढ़वा : पलामू लोक सभा क्षेत्र में कॉग्रेस राजद तथा भाजपा जैसे बड़े राजनीतिक दलों में ही 2019 लोक सभा चुनाव के मदेनजर चहलकदमी षुरू नही हुइ है। छोटे - छोटे राजनीति पाटिर्यो में भी इस संसदीय क्षे़त्र से चुनाव लड़ने को ले सुगबुगाहट षुरू हो गयी है। बसपा , झाविमो तथा नवजवान संघर्ष मोर्चा जैसी पार्टियो से चुनाव लडने की मंषी पाले संभावित प्रत्याषी चुनावी मोड पर है। मगर इनकी मुष्किल है कि गठबंधन के इस गढ़मगढ में उनकी पार्टी का अबतक स्टैंड क्या होगा क्लीयर कौन कहे आंकलन कर पाना भी नामुमकिन सा है। बावजुद समय और परिस्थिति के अनुसार ऐसे दलो से चुनाव लड़ने की मंषा पाले नेता गंगा मे जौ बुनने के अंदाज में ही सही मगर हांथपांव मारने में पीछे नहीं है । इसके पीछे ष्षायद इनकी सोच रही होगी कि कहिं समय ने साथ दिया तो उनका भी सांसद बनने के बर्षो पुरानी मंषा को पंख लग जाए। इन छोटे दलो में झाविमों से तो एक तरह से प्रभात भुइयां स्वयंभू उम्मिदवार समझे जाते है। इनके सामने अगर मुष्किल है तो सिर्फ इतना ही कि बाबुलाल किसके साथ गठबंधन का गांठ मजबुत करेंगे इसपर सस्पेंष बरकरार है। कहीं यूपिए गठबंधन के साथ गए जिसमें काग्रेस राजद झामुमो तथा इनकी पार्टी जेवीएम एक साथ हो गया तो इनका बंटाधार होना फिलहाल सौ फिसदी तय है । क्योंकि तब इन्हे पलामू की सीट इनकी पार्टी को मिलने की उम्मिद नही के बराबर है। दुसरा कोइ गठबंधन बना या जेबीएम अकेले चुनाव लड़ा तो बात बनेगी सो अभी से गढ़वा वंषीधर नगर हुसैनाबाद पाटन छतरपुर किसी न किसी बहाने दौरे का दौड़ लगा रहें है। हाल फिलाहाल दिलीप सिंह नामधारी के साथ वंषीधर नगर में रामचन्द्रकेषरी तथा के साथ युगलबंदी कर चुके है। इसे लोकसभा चुनाव से जोड़कर ही देखा जा सकता है।
पलामू लोक सभी से एक राजनीतिक पार्टी है बहुजन समाज पार्टी जिसका ग्राफ कब कैसे बढ़ घट जाएगा इसका आकलन करना मुष्किल हो जाता है । क्योंकि 2004 के चुनाव में कामेष्वर बैठा भले ही पलामू से लोक सभा का चुनाव नही जीत पाए मगर दूसरे नम्बर पर सम्मानजनक वोट लाकर सबकों चौकाने करते हुए ऐसा प्लेटफार्म तैयार किए कि 2009 में जेएमएम के टिकट पर चुनाव जीतकर लोकसभा तक पहुच हीं गए। दूसरा यह कि पिछले विघान सभा चुनाव में बसपा पलामू लोकसभा क्षेत्र के छह सिट पर ने केवल सम्मनजन वोट लाकर सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बनकर उभरी थी , बल्कि झारखंड में बसपा का खाता भी इस लोक सभा के हुसैनाबाद विधन सभा क्षेत्र से खुल गया, जिसमें षिवपूजन मेहता विधायक बने तथा भवनाथपुर से ताहिर अंसारी ने सम्मानजनक वोट लाया था। ऐसे में बसपा के अंदर खाने में खिचड़ी पक रही है कि इस बार किसी ताकतवर दल से गठबंधन कर अथवा अकेले अपने दम पर चुनाव लडकर पलामू लोकसभा जीता जाए , सपना देखने के पीछे एक और बात छनकर चर्चा में आ रही है कि लालू यादव बिहार में नीतिष के जदयू के वोट बैंक का काउंटर के लिए बसपा के साथ हांथ मिलकर लोक सभा चुनाव लड़ सकते है। जिसमें बिहार के छह सिटों के साथ पलामू को भी वे एक सातवां अपने कोटे का सीट छोड़ सकते है। इसके लिए बातचीत चल रही है। चर्चा तो यहां तक हैं कि राजद के साथ गठबंधन में पलामू सीट बसपा के कोर्टे में आया तो बर्षो से पलामू से एमपी बनने की मंषा पाले इस पार्टी को पलामू मे खड़ा करनेवालो ं मे से एक षिक्षक रघुराइ राम को पुरष्कार स्वरूप बसपा चूनाव मैदान में उतारकर अपनी धमेकेदार इन्ट्री कर सकती है। यदि गठबंधन नही हुआ तो भी बसपा से गढ़वा में कल्याण पदाधिकारी रहे गनौरी मोची का नाम चुनाव लड़ने के लिए सामने आ रहा है । तात्पर्य यह कि पलामू लोक सभा चुनाव में बसपा भी इसबार करिष्मा बिखरने के फिराक में है। नवजवान संघर्ष मोर्चा ने भी इस बार पलामू प्रमंडल के धरती को अपना बताते हुए इस लोक सभी पर हक जता दिया है। मोर्चा के कोर कमेटी ने हालफिलहाल में पलामू तथा चतरा से चुनाव लोक सभा लड़ने का निर्णय लिया है। हलाकि मोर्चा के पास कोइ दमदार उम्मिदवार नही दीख रहा है मगर आनेवाले समय में गठबंधन के पेंच में कोइ बड़ा नेता बड़े राजनीतिक पार्टी से टिकट नही मिलने पर मोर्चा से चुनाव मैदन में कुद जाए तो इससे इंकार नहीं किया जा सकता । े


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