नगरउंटारी नगर पंचायत चुनाव में बसपा का हाथी दे रहा है कमल फूल और तीर धनुष को चुनौती

नगरउंटारी/गढ़वा: झारखण्ड के सीमान्त पर स्थित गढ़वा जिले का उत्तर प्रदेश
से सटा नगरउंटारी अनुमण्डल मुख्यालय का नगर पंचायत चुनाव में झारखण्ड के
दुसरे नगर निकाय की तुलना में तस्वीर कुछ उल्टा नजर आ रहा है। यहां पर
सत्ताधारी दल भाजपा हो अथवा प्रमुख विपक्षी दल झामुमो, दोनो पार्टी के
प्रत्याशी बसपा के हाथी से परेशान हैं। हाथी यहां ऐसा चिंघाड़ मार रहा है
कि भाजपा का कमल निशान तथा झामुमो का तीर धनुष काफी जोर मारकर भी हाथी से
पीछा नही छुड़ा पा रहा है। तात्पर्य यह कि नगरउंटारी नगर पंचायत चुनाव में
अध्यक्ष व उपाध्यक्ष दोनो ही पद पर त्रिकोणिय मुकाबला है। यह बात दिगर है
कि अध्यक्ष पद पर भाजपा की विजय लक्ष्मी अपनी करिश्माई छवि से चुनाव को
अपने पक्ष में समीकरण बैठाने में निरंतर भागदौड़ कर रही हैं। इन्हे भाजपा
के परंपरागत वोटों के अलावा स्वजातीय स्वजातीय रजक समाज का भरोसा है। मगर
मुश्किल है कि इन्हे पूर्व विधायक अनंत प्रताप देव का तो साथ मिल रहा है
मगर टिकट नही मिलने से नाराज दलित समाज के अधिकांश भाजपा नेताओं के
भीतरघात का सामना करना पड़ रहा है। विजया लक्ष्मी को बसपा की हाथी की
सवारी कर रही किरण देवी भारी चुनौती देती दिख रही हैं। किरण के चुनाव
प्रचार के सारथी बसपा नेता ताहिर के समर्थन के कारण जहां एक ओर मुस्लिम
मतदाताओं का साथ मिलने का पुरा यकीन है वहीं इन्हे अपने स्वजातीय
बहुसंख्यक मोची समाज के समर्थन से नगरउंटारी नगर पंचायत के अध्यक्ष पद
में पुरी तरह से त्रिकोण बनाती दिख रही हैं। झामुमो की नेहा को भी भाजपा
से नाराज दलित नेताओं का अन्दरुनी साथ व स्वजातीय दास समाज के वोट के
अलावा कन्हैया चैबे के जनाधार पर भरोसा है। इसी भरोसे अध्यक्ष पद पर नेहा
कुमारी हाथ पांव मार रही हैं। जबकि नगरंटारी नगर पंचायत चुनाव में राजद
का लालटेन लिये सिमा देवी व आजसू के सिंबल पर चुनाव लड़ रही शिवपतिया देवी
भी अपने हिसाब से चुनावी समीकरण को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है।
मगर इनका प्रयास कहा तक रंग लायेगा यह आने वाला वक्त ही तय करेगा।
        जहां तक उपाध्यक्ष पद का प्रश्न है नगरउंटारी मंे उपाध्यक्ष के पद पर भी
मुकाबला त्रिकोणिय बनता दिख रहा है। पूर्व प्रमुख व निर्दलिय उपाध्यक्ष
पद की प्रत्याशी लता देवी, बसपा के भरदुल राम चंद्रवंशी तथा झामुमो के
सुरेंद्र प्रसाद के बीच एक दुसरे को पछाड़कर आगे बढ़ने की होड़ मची है। इस
लड़ाई में भाजपा के उम्मीदवार ओमप्रकाश गुप्ता भी मुकाबले को चतुष्कोणिय
बनाने के प्रयास में रात दिन एक कर चुके हैं मगर इन्हे अपनों का ही साथ
भरपुर नही मिल रहा है। मगर उपाध्यक्ष पद पर यहां चुनाव मैदान में
सर्वाधिक आठ उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें उक्त तीनों के
अलावा कांग्रेस के शैलेश चैबे, भाकपा के रामेश्वर अकेला, निर्दलीय पीयूष
जायसवाल तथा संजय अग्रहरि भी अपने-अपने हिसाब से चुनावी समीकरण को साधने
में लगे है। अभी चुनाव प्रचार मध्यान्ह पर है लिहाजा मतदान तक उंट किस
करवट बैठेगा कहना कठिन है।

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