गढ़वाः जैसे-जैसे नगर परिषद के चुनाव का समय नजदीक आता जा रहा है। जातीय गोलबंदी को ले विभिन्न पार्टियों से कई बड़े नेता प्रत्याशियों के सर्मथन में कुद पड़े हैं। शुरू से ही अल्पसंख्यक तथा ब्राहम्ण मतदाताओं के सहारे चुनाव मैदान में अपने-अपने पक्ष में समीकरण बैठाने केे प्रयास में जूटे प्रत्याशियों ने अंतिम दाव लगाते हुए प्रभावशाली जाती के आधार पर वोट पाने की मंशा को चरम पर पहुंचाते हुए बड़े-बड़े ब्राहमण तथा मुस्लिम क्षत्रपों को चुनाव मैदान में उतार दिया है। कौन सा नेता ब्राहम्ण का तथा मुस्लिम का पोप है, इसे साबित करने की भी होड़ सी मच गयी है।
दरअसल गढ़वा नगर परिषद चुनाव में मुस्लिम ,राजपूत तथा समाजिक न्याय पसंद पिछड़ी जातियों को साधकर राजद आदिवासी ब्राहम्ण, अल्पसंख्यक तथा पिछड़ी जाति के सहारे झामुमो तथा बनिया ब्राहम्ण एवं हिन्दुपरस्त दुसरे जातियोें के मतदाताओं के भरोसे भाजपा चुनावी समीकरण बैठाने के प्रयास में है। इस क्रम में भाजपा की प्रत्याशी पिंकी केशरी के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर राजनीतिक घेराबंदी कर भी झामुमो, राजद समेत तमाम भाजपा विरोधी पार्टियां अपनी चुनावी नैया को पार लगाने में लगे थे। मगर प्रचार अभियान का पुरा सप्ताह गुजर जाने के बाद भी जब प्रत्याशियों को अपने पक्ष में चुनावी समीकरण निर्णायक नहीं महसुस हुआ तो कई छत्रपों को इस चुनावी मैदान में इन्ट्री हुआ। ब्राहम्ण तथा मुस्लिम मतदाताओं को अपने गोलबंदी के लिए घेराबंदी बढ़ाया गया। खासकर कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में ददई दुबे का चुनाव प्रचार में इन्ट्री से एक सवाल उठने लगा है कि ब्राहम्णों का पोप कौन? भाजपा विधायक सत्येन्द्रनाथ तिवारी अथवा कॅाग्रेस के प्रभावशाली नेता ददई दुबे, मिथिलेश, जो ब्राहम्ण मतदाताओं को अपने - अपने पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में वोट दिलवा सकेगें।
कमोबेश ऐसी ही स्थिति मुस्लिम वोट पर पकड़ रखने वाले नेताओं को लेकर भी बन गयी है। नगर परिषद चुनाव के मैदान में चार महत्वपुर्ण चेहरे चुनाव लड़ रहे हैं । इनमें झामुमो से उपाध्यक्ष के पद पर खुद डाॅ यासिन अंसारी की राजनीतिक विरासत के सहारे डाॅ असजद अंसारी चुनाव मैदान में है। जिनके लिए डाॅ यासीन रात-दिन एक कर शुरूआती दौर से मुस्लिम मतदाताओं के बीच वोट के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है। दुसरा चर्चित चेहरा भी मुस्लिम समुदाय से राजद के उपाध्यक्ष पद पर मो शमीम का है। प्रतिष्ठित पीर मोहम्म्द परिवार से चुनाव मैदान में उतरे शमीम राजनीति के एक जाने पहचाने चेहरा हैं साथ ही डाॅ यासीन अंसारी की तरह इनका पारिवारिक पृष्ठभूमि भी सौफट मुस्लिम का है जिनका हिन्दु परिवार के बीच भी पकड़ है। इसके अलावा अध्यक्ष पद पर काॅग्रेस से कमर सफदर तथा बसपा के हांथी पर सवार होकर छुन्नु कुरैषी की मां नैमु निशा चुनाव मैदान में है। साथ ही राजद के पुर्व विधायक गिरीनाथ सिंह तथा मिथिलेश ठाकुर को भी मुस्लिम मतदाताओं पर भारी भरोसा है। लिहाजा उक्त चारो प्रत्याषियों में से कौन मुस्लिम समाज पर अधिक प्रभाव डालकर वोट अपे पक्ष में कितना करेगा इस होड़ में यहां भी पोप कौन का सवाल बनता जा रहा है। इसके अलावा भी गढ़वा के चुनावी समर में एक नया समीकरण बैठाने का प्रयास राजद की ओर से किया गया है, जिसमें भाजपा से राजद का अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष दोनों पदों पर सीधी लड़ाई है। इसे प्रचारित कर मुस्लिम मतदाओं को भाजपा के खिलाफ राजद को वोट देने के लिए प्रेरित करना है । इसी तरह से भाजपा की ओर से विशेषकर अध्यक्ष के पद पर ब्राहम्ण मतदाताओं के लिए गिरिनाथ सिंह बनाम सत्येन्द्र नाथ के राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई प्रचारित किया जा रहा है। यह चुनावी पैतरेबाजी किसे कितना फायदा पहुंचायेगा यह तो आनेवाले वक्त में चुनाव परिणाम ही बताएगा, मगर फिलहाल यह कहना अन्यथा नहीं होगा कि गढ़वा में मुस्लिम तथा ब्राहम्ण मतदाताओं की पोप बनने की होड़ सी मची हुइ है।


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