त्रेता के साधु-सन्यासी ही बने थे द्वापर में गोपियाँ

गढ़वा:-श्री रामलला मन्दिर गढ़वा में श्री रामनवमी महोत्सव के पांचवे दिन आचार्य संजय कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्री कृष्ण के चरित्र की चर्चा की। इस मौके पर भगवान श्री कृष्ण की झांकी भी निकाली गई। महिलाओं ने झांकी की आरती उतारी, मंगल गीत गाया एवं नृत्य किया। इस मौके पर आचार्य श्री ने कहा कि कृष्ण ने निःवस्त्र सरयू में स्नान कर रही गोपियों के वस्त्र लेकर कदम के पेड़ पर चढ़ गए थे। गोपियों ने काफी अनुनय किया तो कृष्ण ने उन्हें अपना कपड़ा ले जाने को कहा। दिक्कत यह थी कि गोपियाँ पानी से निकल नहीं सकती थीं। क्योंकि पानी ही उनके वस्त्र का कार्य कर रहा था। अंत मे कृष्ण ने उनका वस्त्र वापस कर दिया। बाबा ने कहा कि इस प्रकरण पर कुछ लोग सवाल उठाते हैं। भगवान कृष्ण के चरित्र पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हैं। उन्होंने कहा कि उस वक्त कृष्ण की उम्र महज पांच वर्ष थी। उस उम्र में स्त्री-पुरुष का ज्ञान अथवा कामवासना की समझ नहीं होती। केवल बाल शरारत होती है। उन्होंने एक प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि जब भगवान श्री राम वनवास को निकले थे तो वह दण्डकायन वन से गुजर रहे थे। भगवान की स्थिति पर तरस खाते हुए साधु सन्यासियों ने भगवान से अपनी अर्धांगनी बनाने का निवेदन किया, ताकि वे भगवान की सेवा कर सकें। भगवान ने उन्हें मना करते हुए कहा कि द्वापर युग मे उन्हें यह मौका मिलेगा। असल मे द्वापर की गोपियाँ त्रेता युग के साधु-सन्यासी ही हैं। बाबा ने ब्रज वासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए श्री कृष्ण द्वारा अपनी अंगुली पर पूरा गोबर्धन पर्वत को सात दिनों तक उठाए रखने की कहानी भी सुनाई। इस तरह उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के कई रूपों का वर्णन किया। मौके पर उनकी टीम के सदस्य सुनील शास्त्री, रबिन्द्रनाथ तिवारी, धनजी, मन्दिर कमेटी से सचिव धनन्जय सिंह, उपाध्यक्ष सुदर्शन सिंह, कोषाध्यक्ष धनन्जय गोंड, कार्यालय मंत्री धनन्जय ठाकुर,संरक्षक बैजनाथ सिंह, महेंद्र प्रसाद, जितेंद्र कमलापुरी, अनिल शर्मा, संजीव दत्त चौबे, रविन्द्र ओझा सहित एक हजार से अधिक महिला-पुरुष भक्तगण उपस्थित थे।

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