भाव अथवा कुभाव से भगवान का नाम जपने वाले का हो जाता है उद्धार : अरुण कृष्ण




गढ़वा।
वस्तु शक्ति ज्ञान की अपेक्षा नही करती। भाव अथवा कुभाव से भगवान का नाम जपने वाले का भी उद्धार हो जाता है। उक्त बातें गढ़वा शहर के सहिजना स्थित बाबा सोमनाथ मन्दिर परिसर में दुर्गा पूजा के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण संगीतमय कथा का प्रवचन करते हुए वृंदावन से आए महाराज अरुण कृष्ण शास्त्री ने रविवार की रात्रि कही।
    महाराज अरुण कृष्ण ने अजामिल प्रसंग की संगीतमय व्याख्या करते हुए कहा कि जैसे अग्नि में कोई उसके महत्व को जाने बिना गिर जाए तो वह जले बिना नही रह सकता। अमृत के महत्व जाने बिना कोई यदि अमृत का जलपान कर ले तो वो मुक्त हो जाता है, गंगा के महत्व को जाने बिना कोई गंगा जी में डुबकी लगाए तो उसका उद्धार हो जाता है। उसी प्रकार भगवान के नाम को कोई भी व्यक्ति भाव से अथवा कुभाव से जपता है तो उसका उद्धार हुए बिना नही रहता। महाराज अरुण कृष्ण ने वृत्रासुर के प्रसंग की व्याख्या करते हुए कहा कि धर्म के मर्यादा में अर्थ और काम होना चाहिए जिससे मोक्ष स्वतः ही प्राप्त हो जाया करता है। जिस मनुष्य को भगवान की भक्ति न प्राप्त हो, वह संतो के चरणो में अनुरक्ति करे जिससे भगवत कृपा स्वतः ही प्राप्त हो जाएगी। प्रह्लाद चरित्र की चर्चा करते हुए उन्होने कहा कि भगवान सब पर समान कृपा करते है और यह संसार एक अंधकूप है इस अंधकूप में सांसारिक व्यक्ति गिरता चला जा रहा है। नवधा भक्ति की भी उन्होने वृहद व्याख्या की। गज-ग्राह का वर्णन करते हुए उन्होने कहा कि जैसे गजराज को ग्राह ने पकड़ लिया तो भगवान ने उसका उद्धार किया। उसी प्रकार मनुष्य को वृद्धावस्था भी अपने प्रभाव में लेती है तब जाकर अंत में यह जीव हरि के शरण में जाता है और वह जीव इस जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो पाता है। इस अवसर पर श्रीराम कथा एवं कृष्ण प्राक्ट्य की कथा सुनाते हुए नंदोत्सव मनाया गया। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की झांकी निकाली गयी तथा भक्तिमय गीतो के बीच उपस्थित श्रद्धालु आस्था के साथ झुम उठे। इस मौके पर संगीतमय कथा  प्रस्तुति में बांसुरी पर महेन्द्र प्रसाद, आर्गन पर सोनु मिश्रा, नाल पर दिनेश जी, पैड पर गगन जी ने संगत किया तथा स्वर आचार्य महेश उपाध्याय ने भी दी।

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