प्रेम, प्रार्थना और भक्ति से भगवान होते हैं प्रकट : महाराज अरुण

प्रेम, प्रार्थना और भक्ति से भगवान होते हैं प्रकट : महाराज अरुण
बाबा सोमनाथ मन्दिर परिसर में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा जारी

गढ़वा ।
भगवान को प्राप्त करने की कोई निश्चित उम्र, स्थान अथवा अवस्था नही होती। प्रेम, प्रार्थना और भक्ति के द्वारा भगवान को प्रकट किया जा सकता है। उक्त बातें वृंदावन से पधारे महाराज अरुण कृष्ण शास्त्री ने शनिवार की रात्रि शहर के सहिजना स्थित बाबा सोमनाथ मन्दिर परिसर में दुर्गा पूजा के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण संगीतमय ज्ञान यज्ञ के प्रवचन के दौरान कही।
    महाराज अरुण कृष्ण ने कहा कि जिस प्रकार दुध के कण-कण में घी समाया हुआ है उसी प्रकार इस संसार के अणु-अणु में परमात्मा सर्वत्र और सर्वदा व्याप्त हैं। उन्होने भरत चरित्र की कथा का चित्रण करते हुए कहा कि हमारे देश में तीन भरत हुए। एक भरत भगवान श्रीराम के छोटे भाई, दुसरे भरत दुष्यंत पुत्र और तीसरे भरत जड़भरत हुए। इन्ही के नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा। महाराज अरुण कृष्ण ने कहा कि भारत देश को जननी की उपाधि दी गयी है। इस भारत भूमि में जन्मलेना ही गौरव की बात है। हमारे देश भारत में भगवान का विराट ह्रदय है। चाहे विश्व में कितनी भी भौतिकवादी विकास हो परन्तु हमारे भारत में धर्म की ही सत्ता सदा सर्वत्र रहेगी। हमारा देश भारत विश्व गुरु के रुप में प्रतिष्ठित था और हमेशा विश्व गुरु रहेगा। भारत शब्द की व्याख्या करते हुए उन्होने कहा कि ‘भा‘ का अर्थ ‘ज्ञान रुपी प्रकाश‘ तथा ‘रत‘ का अर्थ ‘निरथ‘ अर्थात आध्यात्मिक प्रकाश से विश्व को प्रकाशित करने वाला से है। महाराज अरुण ने सति चरित्र की व्याख्या करते हुए कहा कि किसी भी यज्ञ, अनुष्ठान अथवा सत्कर्म का उददेश्य परमात्मा की प्राप्ति है न कि किसी को नीचा दिखाना। सति चरित्र का चित्रण करते हुए उन्होने कहा कि माताओं को अपने पति में ही निष्ठा रखते हुए उनके वचन का आदर करते हुए जीवन यापन करना चाहिए। इस अवसर पर पूजा समिति के धरनीधर प्रसाद, अनिल पाण्डेय, सुनील गुप्ता, बिन्देश्वर प्रसाद, अभय सिन्हा, संजीव कुमार सिंह, सुरेश राम आदि उपस्थित थे।

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