है. इस स्वास्थ्य केंद्र में ना पीने के पानी की व्यवस्था है, और ना ही शौचालय की. आनन-फानन में शौचालय में पैन तो लगा दिया गया किंतु अभी तक दरवाजा नही लगाया जा सका है. चार माह पूर्व पानी के लिए डीपबोर किया गया था किन्तु उसमें अजतक चापाकल नहीं लगा. मरीजों के लिए बेड पर चादर की व्यवस्था नहीं है और नहीं इमरजेंसी वार्ड है. अभीतक इस अस्पताल को बिजली नही मिल पायी है.यहां दिन में भी जगह-जगह पर अंधेरा छाया रहता है. यहां महिला डाक्टरों की भी कमी है.प्रसव में काफी कठिनाई होती है. इस अस्पताल का ओपीडी सुबह नौ बजे से शाम तीन बजे तक खुला रहता है. इसके बाद अस्पताल अट्ठारह घंटे के लिए बंद हो जाता है.बताते चलें कि इस अस्पताल में तीन डाक्टर सहित कुल तेरह स्टाफ हैं.किन्तु कुछ ही लोग नियमित दफ्तर आते हैं .आलम यह है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन एक ऐतिहासिक धरोहर की तरह कांडी बाजार में चुपचाप खड़ा है. सूत्रों के अनुसार लगातार तीन दिनों से एक भी डॉक्टर इस अस्पताल में उपस्थित नहीं हुए.कमोवेश इस अस्पताल में हेल्थ एजुकेटेड मदन कुमार का भी यही स्थिति है. शुक्रवार को डॉक्टर गौरव विक्रम को छोड़कर दूसरे डॉक्टर नदारद थे. जब हालात का जायजा लिया गया तब पता चला कि इस अस्पताल में डॉक्टर,वार्ड ब्वॉय, नर्स व गार्ड सहित कुल तेरह स्टाफ हैं लेकिन इनकी नियमित उपस्थिति नहीं हो पाती है. जबकि सब के हस्ताक्षर नियमित बन जाते हैं. शुरुआत में इस अस्पताल में मरीजों की काफी भीड़ हुआ करती थी किंतु यहां की अव्यवस्था व डॉक्टरों की लापरवाही तथा उच्च पदाधिकारियों द्वारा अनदेखी किए जाने के कारण मरीज अपने जान जोखिम में डालकर झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाने को मजबूर हैं. सूबे के स्वास्थ्य मंत्री का विधानसभा क्षेत्र होने पर यह सवाल उठना लाजिमी है .
दो माह पूर्व जिले की तत्कालीन डीसी नेहा अरोड़ा द्वारा इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया गया था तथा यहां की लापरवाही को देख कर सिविल सर्जन गढ़वा को कई दिशा-निर्देश दिये गये थे किंतु दो माह गुजर जाने के बाद भी व्यवस्था जस का तस है. ऐसे में प्रधानमंत्री द्वारा आयुष्मान भारत की कल्पना करना बेईमानी सी लगती है. शनिवार को अस्पताल में डॉक्टर प्रदीप मरांडी की ड्यूटी थी किंतु वह भी नहीं पहुंचे.
लगभग ऐसे ही हालात रहते है जिससे दर्जनों मरीज निराश होकर झोलाछाप डॉक्टर से इलाज कराने को मजबूर होते हैं. लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल व सरकारी डॉक्टरों से कहीं ज्यादा बेहतर झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना है क्योंकि वे हरवक्त मौजूद रहते हैं.
*क्या कहा कांडी मुखिया ने* : इस संबंध में कांडी मुखिया विनोद प्रसाद ने कहा कि कांडी अस्पताल की हालत कमोवेश ऐसा ही है.यहां के स्टाफ के अंदर कर्तव्यनिष्ठा समाप्त हो चुकी है.
*क्या कहा प्रभारी ने:* इस संबंध मे प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाक्टर कमलेश कुमार ने कहा कि कर्मा व मुहर्रम त्योहार के अवसर पर दोनो छुट्टी पर थे.डाक्टर गौरव विक्रम ड्युटी पर थे.शनिवार को डाक्टर क्यो नही आए.पता करते हैं.


No comments:
Post a Comment