मझिआंव:बरडीहा प्रखण्ड अंतर्गत राजकीय मध्य विद्यालय लोका के पारा शिक्षक ब्रह्मदेव यादव 45वर्ष की समुचित इलाज के अभाव में कैंसर से मौत हो गई.मृतक के परिजनों ने बताया कि श्री यादव पिछले एक वर्ष से कैंसर से जूझ रहे थे. उनके मानदेय की राशी कम होने और कई माह से मानदेय नही मिलने के कारण किसी तरह कर्ज लेकर उनका इलाज कराया जा रहा था, लेकिन समुचित राशी के अभाव के कारण उनका बड़े अस्पताल में नियमित इलाज नहीं हो सका.जिसके कारण उनकी मौत हो गई. उक्त पारा शिक्षक अपने पीछे चार पुत्री एवं एक नाबालिग पुत्र को छोड़ गए हैं. उनकी मौत से घर में कोहराम मच गया, तथा गांव में मातम छा गया. सभी लोग सरकार की दोहरी नीति की आलोचना करते देखे गए. दाह संस्कार में शामिल होने आए पारा शिक्षक धर्मेन्द्र पाल, महेंद्र पाण्डेय, रघुबंसी यादव, रामसुमेर राम, नागेंद्र मेहता, रविन्द्र पाल, रमेश राम, धर्मेन्द्र यादव, जयरूप यादव, एवं उदय राम सहित कई लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा कि हम लोग सरकारी शिक्षक की तरह से ही समान रूप से छात्रों को पढ़ाते हैं, लेकिन दोनों के वेतन में भारी असमानता है.पारा शिक्षकों ने शिक्षक की दिवंगत आत्मा के शांति हेतु प्रार्थना की, और उनके क्रियाकर्म के लिए एक दिन का मानदेय देने का संकल्प लिया.
मझिआंव:बरडीहा प्रखण्ड अंतर्गत राजकीय मध्य विद्यालय लोका के पारा शिक्षक ब्रह्मदेव यादव 45वर्ष की समुचित इलाज के अभाव में कैंसर से मौत हो गई.मृतक के परिजनों ने बताया कि श्री यादव पिछले एक वर्ष से कैंसर से जूझ रहे थे. उनके मानदेय की राशी कम होने और कई माह से मानदेय नही मिलने के कारण किसी तरह कर्ज लेकर उनका इलाज कराया जा रहा था, लेकिन समुचित राशी के अभाव के कारण उनका बड़े अस्पताल में नियमित इलाज नहीं हो सका.जिसके कारण उनकी मौत हो गई. उक्त पारा शिक्षक अपने पीछे चार पुत्री एवं एक नाबालिग पुत्र को छोड़ गए हैं. उनकी मौत से घर में कोहराम मच गया, तथा गांव में मातम छा गया. सभी लोग सरकार की दोहरी नीति की आलोचना करते देखे गए. दाह संस्कार में शामिल होने आए पारा शिक्षक धर्मेन्द्र पाल, महेंद्र पाण्डेय, रघुबंसी यादव, रामसुमेर राम, नागेंद्र मेहता, रविन्द्र पाल, रमेश राम, धर्मेन्द्र यादव, जयरूप यादव, एवं उदय राम सहित कई लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा कि हम लोग सरकारी शिक्षक की तरह से ही समान रूप से छात्रों को पढ़ाते हैं, लेकिन दोनों के वेतन में भारी असमानता है.पारा शिक्षकों ने शिक्षक की दिवंगत आत्मा के शांति हेतु प्रार्थना की, और उनके क्रियाकर्म के लिए एक दिन का मानदेय देने का संकल्प लिया.


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