गढ़वा: व्यवहार न्यायालय गढ़वा के अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता आशिष कुमार दुबे के साथ पुलिस कर्मियों द्वारा थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करते हुए किया गया पिटाई का मामला गरमा गया है। इसे लेकर गढ़वा जिला अधिवक्ता संघ ने आज बैठक कर तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किये जिसके अनुसार संघ ने मांग किया है कि इस मामले में आज दोपहर तक एसपी, थानेदार तथा संलिप्त पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज करते हुए गिरफतार किया जाए। साथ ही गिरफतारी नही होने की स्थिति में एक सप्ताह तक गुरूवार से काला बिल्ला लगाकर घटना के विरोध में गढ़वा व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता काम करेगे। इसके बाद भी कार्रवाई नही हुई तो अनिष्चितकालीन हड़ताल पर चले जायेंगे। साथ ही अधिवक्ता के साथ पिटाई के मामले की जांच झारखण्ड पुलिस से न कराकर किसी दुसरी स्वतंत्र एजेन्सी से कराने की मांग प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश, गढ़वा के माध्यम से किया जाएगा। साथ ही निर्णय की प्रति प्रति राष्ट्रपति तथा केन्द्रीय गृहमंत्री को भेजने का भी निर्णय लिया गया।
जबकि इधर इस मामले में पुलिस विभाग से बयान जारी कर कहा गया है कि सोमवार की शाम करीब साढ़े आठ बजे रंका मोड़ पर वाहनों का जाम लगा हुआ था। जाम में महिला, पुरुष एवं बच्चे फंसे हुए थे। इसी समय संध्या गस्ती से पुलिस अधीक्षक गढ़वा महोदय लौट रहे थे।
रंका मोड़ पर जाम की स्थिति को देखते हुए उन्होंने पीसीआर वाहनों को बुलाया था। तुरंत जाम हटाने का निर्देश दिया एवं पीसीआर की मदद के लिये अपना स्कोर्ट वाहन वहीं छोड़कर खुद आवासीय कार्यालय के लिए रवाना हो गए।
आवासीय कार्यालय पहुचने के बाद पुलिस अधीक्षक महोदय को ट्रैफिक पुलिस द्वारा बताया गया कि एक ब्यक्ति को थाना लाया गया है जो रंका मोड़ पर सड़क के बीचोबीच खड़ा होकर आसपास से गुजर रहे वाहनों की वीडियो बना रहा था, जिसमें महिलाएं एवं बच्चियां भी थी। उसे ऐसा करने से यातायात और बाधित हो रहा था। पुलिस कर्मियों द्वारा बीच सड़क से हटने एवं वीडियो बनाने से मना किया गया। परंतु वह व्यक्ति सड़क से हटने के बजाए लगातार अपनी गतिविधि जारी रखा। पुनः उसको वहाँ से हटने के लिए कहने पर वह पुलिस कर्मियों से अपशब्द का प्रयोग करने लगा तथा पुलिसकर्मियों से उलझ गया। पुलिस कर्मियों को उसे बलपूर्वक बीच रास्ते से हटाकर थाना लाना पड़ा। इस क्रम में गिरने के कारण उसे हल्की चोटंे आयी है। मेडिकल जांच रिपोर्ट के आधार पर भी यह चोटे साधारण प्रकृति की है।
थाना लाने के बाद जांच के क्रम में पता चला कि उस व्यक्ति का नाम आशीष दुबे है। जो पेशे से एक अधिवक्ता हैं तथा पहले भी ये फेसबुक आदि पर आपत्तिजनक पोस्ट करते रहे हैं। तथा बंदी के समय सड़क पर सक्रिय रूप से तनाव फैलाने की कोशिश किए थे। जिससे पूर्व में भी गढ़वा में तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई थी। उस समय भी थाना लाकर इन्हें चेतावनी देकर छोड़ा गया था। इनके विरुद्ध थाना में पूर्व में एंट्री भी हुई है। इनसे फेसबुक के विवादित पोस्ट के बारे में लंबी पूछताछ की गई तथा इनकी सहमति से जांच हेतु मोबइल फोन भी जब्त किया गया।
फिर भी पुलिस ने अधिवक्ता होने के कारण सहानुभूति पूर्वक रियायत देते हुए इनपर जमानतीय धारा में कांड दर्ज कर भविष्य में ऐसा नहीं करने की चेतावनी देते हुए इन्हें मुक्त कर दिया।
पुलिस अधीक्षक महोदय के निर्देश पर शहर के विभिन्न चैक चैराहों पर बैठने वाले मनचलों एवं अन्य असमाजिक तत्त्वों के खिलाफ भविष्य में और कड़ी कार्यवाई की जाएगी।
मालूम हो कि रंका मोड़ पर सड़क जाम के दौरान जाम में फंसे एम्बुलेंस के बजाए एसपी के काफिले को जाम से निकलवालने का पुलिस कर्मियों द्वारा किए जा रहे प्रयास का वीडियो लेना समाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता अषिष कुमार दुबे के लिए महंगा साबित हुआ।


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