गढ़वा नगर परिषद के अध्यक्ष पद का मुकाबला बना त्रिकोणीय, एन्टी इन कम्बेसी से हलकान है भाजपा   

गढ़वा: नगर निकाय चुनाव का प्रचार अभियान चरम पर है। चुनाव प्रचार अभियान के साथ- साथ तमाम प्रत्याषी अपने-अपने हिसाब से चुनावी गणित को बैठाने में अपनी ताकत झोंक दी है। इस बिषम परिस्थिति में गढ़वा नगर परिषद का चुनाव दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। 

जहां तक अध्यक्ष पद का सवाल है। इसे लेकर आम चर्चा है कि त्रिकोणीय लड़ाइ मे भाजपा राजद तथा झामुमो के बीच एक दुसरे को पछड़ाने की होड़ सी मची हुई है। भाजपा इसे जीत में बदलने के लिए प्रदेष से लेकर जिला तक के नेताओं को एकजुट करने के लिए पुरी ताकत लगा दी है। मगर भाजपा के सामने एन्टीइन कम्बेसी की समस्या है , जो इसके अध्यक्ष पद के प्रत्याषी पिंकी केषरी पर भारी पड़ रही है। वैसे भी भाजपा यहां के विधायक सत्येन्द्र तिवारी के विरोध को भी पिंकी केषरी के साथ नजदीकि एवं टिकट दिलाने में श्री तिवारी की प्रमुख भुमिका के कारण झेल रही है। ऐसे में भाजपा के अधक्ष पद के प्रत्याषी पिंकी की जीत में पैदा हो रहे इस अवरोध को दुर करने की एक बड़ी चुनौती ही ,जिस षिघ्र दुर करना होगा , वरना भाजपा के अध्यक्ष पद के प्रत्यषी पिंकी के लिए जीत का रास्ता आसान नही होगा। जहां तक राजद प्रत्याषी मणिमा नारायण का प्रष्न ही फिलहाल अल्पसंख्यक मतदाताओं के सर्मथन के बल पर तथा गिरिनाथ सिंह के जनाधार के सहारे ही अध्यक्ष पद की चुनावी दंगल को त्रिकोण बनाते अबतक दीख रही है। इसके साथ ही व्यवस्थित चुनावी प्रचार अभियान एवं दमदार चुनावी कैम्पेनिंग से दुसरे प्रत्याषी इनसे काफी पीछे दीख रहे है, मगर राजद के सामने इसके अल्पसंख्यक वोट पर काॅग्रेस के बड़े राजनीतिक चेहरे कमर सफदर तथा बसपा के नैमु निषा एक बड़ी चुनौती बनती दीख रही है। क्योंकि जैसे - जैसे काॅग्रेस तथा बसपा राजद के अल्पसंख्यक वोट वैंक में सेंधमारी करने में कामयाब होते जाएगें , अध्यक्ष पद की राजद की प्रत्याषी मणिमा नारायण की जीत की राह में रोड़ा खड़ा होता जाएगा। जहां तक झामुमो की प्रत्याषी अनिता दत का सवाल है इनकी पहचान इस चुनाव में कुछ अलग है, क्योंकि दुसरे उम्मीदवारों की पहचान जहां उनके पति व पार्टी के नाम से है, वहीं अनिता दत्त खुद को मतदाताओे के बीच अपने नाम से जानी पहचानी जाती है। वोट मांगने के दौरान इन्हें अपना परिचय बताने की बजाय अपना चुनाव चिन्ह पर ही बात करनी पड़ रही है। मगर इनके सामने झामुमो का अल्पसंख्यंक वोट को अपनी ओर खिंचने की एक बड़ी चुनौती है, जिसे ये जितना अधिक खिंच पाएंगी , इनके जीत की राह उतनी ही आसान होती जाएगी। वैसे अनिता दत्त के लिए सभी इलाको में इनके सर्मथकों का होना एक बड़ा फैक्टर बताया जा रहा है। मगर इनके सामने झामुमो का उपरी नेतृत्व का सहयोग कहां तक मिल पाता है, यह एक बड़ा सवाल है। क्योंकि दलीय आधार पर हो रहे इस चुनाव में पार्टी का कैम्पेनिंग भी मतदाताओं को प्रभावित करेगा इससे इंकार नही किया जा सकता है।  

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