सेनपुरवा स्थित श्रीरामलला मन्दिर में प्रवचन जारी रुक्मणि-श्रीकृष्ण विवाह झांकी में भाव विभोर हुईं माताएं

गढ़वा: श्री राम लला मंदिर सोनपुरवा मैं आयोजित रामनवमी महोत्सव के सातवें दिन प्रवचन कार्यक्रम में वृंदावन से पधारे विद्वान आचार्य संजय कृष्ण शास्त्री ने कंस वध की कथा सुनाई तत्पश्चात रुक्मणी श्री कृष्ण विवाह का प्रसंग का वर्णन किया। इस दौरान रुक्मणी श्रीकृष्ण विवाह की झांकी निकाली गई। इस दौरान कई मंगल गीत गाए गए वरमाला से लेकर बेटी बिदाई तक की रस्म को संगीत के सुरीले दोनों में प्रस्तुत किया गया भजन सम्राट धनजी ने एक से एक मनमोहक गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में समा बांधा। उधर आचार्य संजय कृष्ण शास्त्री ने कंस वध की कथा सुनाते हुए कहा कि कुछ वक्त कन्हैया की उम्र मात्र 11 वर्ष 56 दिन थी। वह नंद बाबा एवं यशोदा के आज्ञाकारी पुत्र के रूप में अपनी लीला दिखा रहे थे। यशोदा ने स्तनपान कर उन्हें इतना मजबूत बनाया था कि उनके अंदर किसी तरह की शारीरिक दुर्बलता नहीं। उन्होंने इस प्रश्न के साथ वर्तमान में स्तनपान को लेकर महिलाओं द्वारा बढ़ते जा रहे कोताही पर भी प्रहार किया। कहां की बोतल का दूध पिलाने से बच्चा की भावना मां से अलग हो जाती है। उसमें वह शक्ति नहीं रहती जिसकी इच्छा मां करती है। उन्होंने कहा कि जब श्री कृष्ण कंस के दरबार में उनके मायावी शक्तियों को मारते हुए कंस के कंधे तक पहुंचे तो कंस ने उन्हें छोड़ देने की विनती की। तब श्री कृष्ण ने 30 वर्ष पूर्व अपनी मां देवकी का
केश पकड़ कर मारे जाने की बात दोहराई, कहा कि उस समय हमारी मां को भी इतना ही बुरा लग रहा होगा। श्री कृष्ण ने कंस का केस पकड़ कर जमीन पर पटक दिया एवं उसकी मौत हो गई। श्री शास्त्री ने रुक्मणी श्रीकृष्ण विवाह प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि रुकमणी ने कृष्ण को पत्र लिखकर उनके गुणों का बखान किया करती थी करती थी। वह श्री कृष्ण को नहीं देखी है परंतु इतना विश्वास है कि ऐसे व्यक्तित्व को व्यक्तित्व कौन मोहित नहीं होगा। रुक्मणी ने कहा कि वह उन्हें चाहती है और वह शिशुपाल के साथ शादी नहीं करना चाहती। यदि उसकी शादी शिशुपाल के साथ हो गई तो फिर उसका जीवित रहना इस दुनिया में व्यर्थ हो जाएगा। श्री कृष्ण रुकमणी को अंगीकार किया एवं उस से विवाह किया। मौके पर कार्यक्रम में उपस्थित महिला पुरुष श्रद्धालुओं ने झांकी को देख कर सचमुच श्री कृष्ण के दर्शन को जीवंत बना दिया। इस मौके पर संरक्षक बैजनाथ सिंह, जितेंद्र कमलापुरी, उपाध्यक्ष सुदर्शन सिंह, सचिव धनंजय सिंह, कोषाध्यक्ष धनंजय गौंड़ आदि मौजूद थे।

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