गढ़वा
प्रकृति से छेड़छाड़ करना मतलब परमात्मा को कष्ट पहुंचाना है। क्योंकि परमात्मा ही प्रकृति के रुप में हम सभी के आंखो के सामने दृश्यमान हो रहे हैं। उक्त बातें महाराज अरुण कृष्ण शास्त्री ने सोमवार की रात्रि सहिजना स्थित बाबा सोमनाथ मन्दिर परिसर में दुर्गा पूजा के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का प्रवचन करते हुए कही।
महाराज अरुण शास्त्री ने कलयुग निग्रह की कथा सुनाते हुए वेणु गीत, चीरहरण लीला एवं गोवर्धनपूजा पूजा की कथा सुनाते हुए कहा कि प्रकृति से छेड़छाड़ करने का अर्थ परमात्मा को कष्ट पहुंचाना है। उन्होने कहा कि पूतना उद्धार की कथा श्रवण से भगवान में रति प्राप्त होती है एवं मायापति के सामने नही टिकती। साथ ही उन्होने गौ संरक्षण एवं संवर्द्धन पर भी प्रकाश डाला। सकट भंजन त्रिणवर्त उद्धार की कथा श्रवण कराते कहा कि भक्त पत्थर में भी भगवान को देखते हैं। परन्तु नास्तिक भगवान में भी भगवान की लीलाओ में भी भ्रम उत्पन्न करते हुए स्वयं भ्रमित रहते हैं। नामकरण संस्कार की कथा के अर्न्तगत उन्होने कहा कि जो अपनी तरफ आकृष्ट करे उसका नाम कृष्ण है, दुसरा अर्थ भूमि के प्राणियो का मन अपनी चरणो से जोड़कर उद्धार कर देने वाले को ही कृष्ण कहते हैं। जैसे एक क्रोधी व्यक्ति क्रोध करने का बहाना खोजता है उसी प्रकार भगवान भी जीव के कर्मो पर ध्यान न देते हुए अपनी करुणा करने का बहाना खोजते हैं। इसी कड़ी में उन्होने माखन चोर की लीला का आध्यात्मिक अर्थ बताते हुए कहा कि माखन का एक नाम नवनीत है जिसका अर्थ मन है। जीव के मन को परमात्मा चुरा कर संसार के बंधन से मुक्त कर देता है। इसी को माखन चोर की लीला कहते हैं। उन्होने कहा कि वृन्दावन का अर्थ जहां भक्तों का समुह इकटठा होकर भगवान की कथा एवं हरि नाम गायन करता है उस स्थान को भी वृन्दावन कहते हैं। इस मौके पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल लीला की झांकी भी प्रस्तुत की गयी तथा डांडिया नृत्य भी प्रस्तुत किया गया। मौके पर पूजा समिति के सचिव नंद किशोर श्रीवास्तव, प्रो. उमेश सहाय, मिथिलेश सिन्हा, अनिल कुमार सिंह, कौशलेन्द तिवारी, अखिलेश तिवारी समेंत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।


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