कांडी: प्रखंड मुख्यालय स्थित +2 उच्च विद्यालय के सभागार में बुधवार को प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. कमलेश कुमार ने प्रखंड के शिक्षकों के साथ बैठक की। जिसमे आगामी 26 जुलाई से शुरू होने वाले खसरा और रुबैला टीकाकरण अभियान में खसरा और रुबैला रोग से बचने के लिए खसरा और रुबैला टीकाकरण के महत्व को बताया । डॉक्टर कमलेश कुमार ने बताया कि खसरा एक जानलेवा बीमारी है और बच्चों में अपंगता और मृत्यु के बड़े कारणों में से एक है।खसरा बहुत संक्रामक रोग है और यह एक संक्रमित व्यक्ति द्वारा खासने और छीकने से फैलता है।खसरा बच्चो को निमोनिया,दस्त और दिमागी संक्रमण जैसी जीवन के लिए घातक बीमारी पैदा करता है। खसरा के आम लक्षण तेज बुखार के साथ साथ त्वाचा पर दिखाई पड़ने वाले लाल चकते,खांसी,बहती नाक और आंख लाल होना है।
स्त्री को गर्भावस्था के आरंभ में रूबैला संक्रमण होता है।जिससे जन्मजात रूबैला सिंड्रोम विकसित हो जाता है।जो भ्रूण और नवजात शिशुओं के लिय गंभीर और घातक साबित हो सकता है।प्रारभिक गर्भावस्था के दौरान रूबैला से संक्रमिक माता से जन्मे बच्चे में दीर्घकालिन जन्मजात विसंगतियो से पीड़ित होने की संभावना बढ़ जाती है जिसमे आंखे(ग्लूकोमा,मोतियाबिंद),कान(बहरापन),मस्तिष्क(माइक्रोसिफेली,मानसिक मदता) प्रभावित होते है और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।रूबैला रोग से गर्भवती स्त्री में गर्भपात,अकाल प्रसव और मृत प्रसव की संभावना बढ़ जाती है।खसरा और रूबैला रोग से बचने के लिय सभी 9 महीने से 15 वर्ष के बच्चो को जरुर टीकाकरण करवाना चाहिए।ताकि स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके।टीकाकरण ही इन रोगों से एक मात्र बचाव का साधन है। ज़िले के हर 9 माह से 15 साल तक के सभी बच्चो को MR का टीका अवश्य लगवाएं। उन्होंने सभी अभिभावको, शिक्षकों तथा बच्चो से इस अभियान को सफल बनाने की अपील की।


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