-बालु माफिया प्रत्यक्ष रुप से गढ़वा के पर्यावरण को पहुंचा रहे हैं क्षति, नवपदस्थापित एसपी शिवानी तिवारी की बड़ी कार्रवाई।



बालु माफिया प्रत्यक्ष रुप से गढ़वा के पर्यावरण को पहुंचा रहे हैं क्षति, नवपदस्थापित एसपी शिवानी तिवारी की बड़ी कार्रवाई, तीन दिनो में करीब 90 मालवाहक गाड़िया जब्त, दो दिनो में डंडा व कांडी थाना प्रभारी कत्र्तव्यहीनता के आरोप में निलंबित
गढ़वा: झारखंड के सिमांत पर स्थित गढ़वा जिले में कोयलाचंल के कोयला माफिया की तरह बालू माफिया तेजी से पांव पसार रहे है। बालू माफिया के बढ़ते प्रभाव से गढ़वा जिले में प्रतिदिन सैकड़ो ट्रक बालू पड़ोसी राज्य उतरप्रदेष अबैध तरीके से ढ़ोया जा रहा है। साथ ही गढ़वा जैसे जिले में माफिया राज के आतंक का साया अभी से महसुस किया जा रहा है, इसकी परकाष्ठा गत बर्ष विषुनपुरा में चार लोगों की निर्मम बालु घाट पर हत्या के रूप में सामने आ चुका है। हालांकि जिले की नवपदस्थापित पुलिस अधीक्षक शिवानी तिवारी ने इस ओर लगाम कसने की तैयारी करते हुए तीन दिनो में करीब 90 विभिन्न मालवाहक गाड़ियों को जब्त कराते हुए तथा दो दिनो में जिले के संबंधित दो थाना प्रभारियों को लापरवाही एवं कार्तव्यहीनता के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस मामले में गुरुवार को डंडा थाना प्रभारी लक्षमण राम को जहां निलंबित किया गया वहीं शुक्रवार को कांडी थाना प्रभारी असित कुमार सिंह को लापरवाही व कर्तव्यहीनता के आरोप में निलंबित किया गया।
  गुरुवार एवं शुक्रवार को हुई पुलिस की कार्रवाई में डंडा थाना क्षेत्र में दो पेलोडर व पांच ट्रक को जब्त किया गया। वहीं केतार थाना क्षेत्र में छ ट्रैक्टर, मझिआंव थाना क्षेत्र में 16 ट्रक, कांडी थाना क्षेत्र में 66 ट्रक, तीन पोकलेन, एक बाईक जब्त किया गया। 
भौगोलिक दृष्टि से गढ़वा जिला नदियों से घीरा है। इसके एक तरफ सीमा पर कोयल जैसी बडी नदी है जो करीब सतर  किलोमीटर में गढ़वा और पलामू जिले को विभाजित करती है। यहां तक कि सोन जैसी अन्र्तप्रान्तीय बड़ी नदी है जो गढ़वा जिले के करीब चालीस किलोमीटर के इलाके से होकर गुजरती है। जबकि यहां छतीसगढ़ तथा युपी की सीमा को विभाजित करने वाली बड़ी अन्र्तप्रान्तीय कनहर जैसी पहाड़ी नदी है जिसके बालू की मांग देष स्तर पर है क्योंकि कनहर का मोटा व खुरदुरा बालू नम्बर एक का है जिसका बाराणसी की मंडी में फिलहाल एक लाख रूपये प्रति ट्रक किमत बालू माफिया वसूल रहे हैं।  इसके अलावा तहले  दानरो ,बांकी पंडी जैसी दर्जनों नदी है जो इस जिले के विभिन्न इलाकों से होकर गुजरती है। इन नदियो का हालत यह है कि जिस ओर निगाह दौड़ा लें बालू माफिया इसका दोहन कर पर्यावरण को भारी नुकसान पहुचंा रहें है। जिले में हजारो ट्रैक्टर तथा जेसीबी बालू उठाकर माफिया के संरक्षण में या तो किसी स्थान पर भंडरण करने में लगे दिखते है, अथवा ट्रक पर लोड करते , बालू माफिया स्थानीय बेरोजगार युवाओें को इस कारोबार से जोड़कर सामने रखकर पर्दे के पीछे से इस खेल को बड़े स्तर पर चला रहे है, तात्पर्य यह कि साइड पर सामने कोइ खड़ा है , ओर कारोबार कोइ कर रहा है। जहां तक खनन विभाग का पुलिस के सहयोग से इस अबैध कारोबार पर नियंत्रण का प्रष्न है, वह कितना कुछ हो पा रहा है इसका जीता जागता मिषाल ताजा कार्रवाइ है। इससे साफ जाहिर होता है कि जिले में बड़े पैमाने पर यह अबैध खेल चल रहा है। 
बालू के अबैध कारोबार का प्रतिकुल असर अभी से गढ़वा जिले में दिखने लगा है, स्थानीय लोगों को मकान बनाने के लिए पिछले एक साल में चार गुणा अधीक किमत बालु का चुकाना पड़ रहा है। वहीं नदी से पांच से आठ फीट तक गहरा खुदाइ कर बालु निकाले जाने से पर्यावरण को भी भारी छति हो रही है, साथ ही नदियों के अस्त्तिव पर प्रष्नचिन्ह लगता जा रहा है। ष

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