गढ़वा नगर परिषद चुनाव, गिरिनाथ बनाम सत्येन्द्रनाथ फैक्टर हुआ प्रभावी।



गढवा: गढ़वा नगर परिषद चुनाव को ले चुनाव प्रचार अभियान चरम पर पहुच गया है। विभिन्न पार्टियों के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी चुनाव प्रचार अभियान में एक दुसरे को पीछे छोड़ने के लिए रात-दिन एक कर रहे हैं। जहां तक चुनावी समीकरण का प्रश्न है, तमाम प्रयासों के बावजूद अध्यक्ष के पद पर शुरुआती दौर की ही तरह भाजपा की पिंकी केशरी, राजद की मनिमा नारायण तथा झामुमो की अनिता दत्त के बीच जो त्रिकोणिय मुकाबला बना था वह आज भी बरकरार है। चुनाव प्रचार के महज 48 घंटे ही शेष बचे हैं बावजूद अध्यक्ष पद के प्रत्याशी के बीच का त्रिकोण बना मुकाबला में एक दुसरे से आगे बढ़ने की होड़ के बीच मतदाताओं की ओर से कोई खास उत्साह नही दिखाया जा रहा है। हां, इतना जरुर है कि इस चुनाव में मुकाबला पार्टी और प्रत्याशी ही नही बल्कि दो नेताओं के राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई का रुप ले चुका है। तात्पर्य यह कि अध्यक्ष के पद पर त्रिकोणिय मुकाबला के बावजूद भाजपा के सत्येन्द्रनाथ तथा राजद के गिरिनाथ इस लड़ाई को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना कर एक दुसरे को अपना दम दिखाने के अंदाज में चुनाव प्रचार में एक-एक चाल चल रहे हैं। इसमें किसका पलड़ा भारी होगा यह तो आनेवाला वक्त तय करेगा मगर दलगत चुनाव होने के बावजूद यहां अध्यक्ष के पद पर खास कर भाजपा व राजद का मुकाबला पिंकी व मनिमा से ज्यादा सत्येन्द्रनाथ व गिरिनाथ का बन गया है।

जहां तक उपाध्यक्ष पद का प्रश्न है यहां भारी गुत्थमगुत्थी चल रही है। भाजपा की मीरा, राजद के शमीम तथा झामुमो के डा़ असजद के अलावा निर्दलिय प्रत्याशी बिनोद जायसवाल उर्फ नेताजी ने मुकाबले को चतृष्कोणिय बना दिया है। जहां तक उपाध्यक्ष के पद पर चुनावी चहलकदमी का प्रष्न है, भाजपा की मीरा का चुनावी अभियान अलखनाथ के नाम पर, राजद के शमीम का चुनाव इंटेक्ट मनिमा के साथ तथा झामुमो के असजद का चुनाव उनके पिता डा़ के कंधो पर चल रहा है। इस चतुष्कोणिय मुकाबले में राजद जीता तो प्रत्याशी के साथ पार्टी, भाजपा जीती तो प्रत्याषी पति के साथ पार्टी व झामुमो जीता तो डा. यासीन अंसारी की साख बची जैसी हालात बन गयी है। जहां तक चुनावी समीकरण को अपने पक्ष में मोड़ने का प्रश्न है, भाजपा अपने परंपरागत वोट ब्राहम्ण-बनिया के साथ पिछड़ी जातियों के सहारे जीत सेहरा पहनने के फिराक में है तो राजद अल्पसंख्यक मतदाताओं को एकजुटता बनाये रखने के प्रयास में। वहीं झामुमो की कोशिश प्रत्याशियों की छवि उनका स्वजातिय वोट व अल्पसंख्यक मतदाताओं का एकमुश्त समर्थन पा लेने की लालसा के बीच राजनीतिक समीकरण बैठा लेने की कोशिश चल रही है। किसकी कोषिष कितना रंग लायेगी यह तो 22 अप्रैल को मतगणना के साथ आयेगा। मगर इस चुनाव में गिरिनाथ बनाम सत्येन्द्रनाथ का फैक्टर प्रभावी हो गया है।

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