राजनीतिक प्रतिष्ठा बनी सत्येन्द्र, गिरिनाथ व मिथिलेश की गढ़वा नगर परिषद चुनाव अध्यक्ष पद फंसा त्रिकोणिय मुकाबले में

गढ़वा: गढ़वा जिला मुख्यालय में नगर परिषद चुनाव को लिए चूनावी घमासान सबाब पर है। जहां एक ओर इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठिा बनाकर भाजपा के प्रदेष उपाध्यक्ष विधायक सत्येन्द्र नाथ तिवारी अपनी करिष्माइ छवि को बरकरार रखने के लिए नगर परिषद के अध्यक्ष पद के प्र्र्र्रत्याषी पिंकी केषरी तथा उपाध्यक्ष पद की प्रत्याषी मीरा पांडेय  को चुनाव जिताने के लिए बनिया व्रहाम्ण समीकरण बैठाकर  एड़ी चोटी का एक कर रहे है। वहीं इस चुनाव को  अच्छा मौका मानकर इनके चिर विरोधी राजद के पूर्व प्रदेष अध्यक्ष व पूर्व विधायक गिरिनाथ सिंह अध्यक्ष पद के प्रत्याषी मनिमा नारायण व उपाध्यक्ष पद के प्रत्याषी षमीम अंसारी को जिताने के लिए मुस्लिम पिछड़ा समीकरण साध कर इस चुनाव के बहाने अपनी खोई हुइ प्रतिष्ठा को प्राप्त करने के लिए रात दिन एक कर लगे हुए है। वही झामुमो के मिथिलेष ने भी अध्यक्ष पद पर दमदार उम्मीदवार अनिता दत को तथा उपाध्यक्ष के पद पर डाॅ यासिन अंसारी के पुत्र डाॅ असजद को उतारकर भाजपा तथा राजद दोनो पार्टियों के लिए मुष्किल खड़ा कर दिया है। हलाकि खुद चाइबासा से अध्यक्ष पद के चुनाव में उलझे होने के कारण मिथिलेष ठाकुर के यहां समय नहीं दे पाने के कारण उनका राजनीतिक जोर तुलनात्क दृष्टि से कम दिख रहा है। मगर इनके विधान सभा चुनाव के सभी स्थानीय सारथी एवं जिलाअध्यक्ष विनोद तिवारी समेत तमाम कार्यकर्ता पसीना बहा रहे है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता है। 
उक्त प्रत्याषियों के अलावा गढ़वा जिले में राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाइ बर्षों से लड़ रही कांग्रेस ने अपनी पूर्व जिलाअध्यक्ष व राजनीतिक की जाने पहचाना चेहरा कमद सफदर को तथा बसपा मैनु निषा को चुनाव मैदान में उतारकर इस चुनावी समीकरण को मुस्लिम मतदाताओं के जरिए अपने पक्ष में साधने की पुरजोर कवायद कर रही है।                  इसके अलावा भी इस चुनाव में कइ ऐसे प्रत्याषी हैं जो अपने बतौलत चुनावी समीकरण को साधने की दावे कर रहे हैं मसलन उपाध्यक्ष के पद पर काॅग्रेस प्रत्याषी राजेष चैबे को ब्राहम्ण वोट का भरोषा है तो बसपा के उपाध्यक्ष पद के प्रत्याषी षिवषंकर मेहता को अपने स्वजातिय कोइरी व दलित मतदाताओं पर तथा आजसू के इस्तेयाक राजा भी अपनी जीत मुस्लिम समीकरण के सहारे हासिल करने की दावे कर रहे है। जबकि भाजपा से अपनी पत्नी कंचन जायसवाल को अध्यक्ष का टिकट मिलने से नाराज बिनोद जायसवाल उर्फ नेताजी भी अपने स्वजातिय मतों के साथ-साथ बनिया समीकरण बनाकर चमत्कार दिखाने की अभी से दावे कर रहे हैं। लिहाजा इस चुनाव में उंट किस करवट बैठेगा यह तो आनेवाला वक्त तय करेगा, मगर फिलहाल ये चुनाव बड़ा ही दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। जिसमें प्रत्याषियों के साथ-साथ इनके राजनीतिक आका की प्रतिष्ठा भी दाव पर लगा हुआ है, क्योंकि इस चुनाव का परिणाम आनेवाला विधानसभा चुनाव के भी रास्ते दिखलायेगें, इससे इंकार नही किया जा सकता है। 

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