निजी स्कूल को अध्ययन केंद्र बनाये:डीसी

समाहरणालय स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में मंगलवार को उपायुक्त डॉ नेहा अरोड़ा ने जिले के सभी निजी विद्यालय के प्राचार्य एवं निदेशक के साथ बैठक की। बैठक में उपस्थित निजी विद्यालय संचालक को निर्देश देते हुए कहा कि बच्चों के घर से  स्कूल लाने एवं पहुंचाने वाले वाहनों में सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए ।इसके लिए सभी बसों में फर्स्ट ऐड की व्यवस्था ,खिड़की पर बाहर से रड तथा जितना सीट है उतना ही बच्चों को बैठाया जाए ।किसी भी स्थिति में सीट से अधिक बच्चों को बस में स्कूल नहीं लाया ले जाया जाए ।ऐसा करने पर कठोर कानूनी करवाई की जायेगी।उन्होंने कहा कि सभी निजी विद्यालय  के निदेशक शिक्षा के अधिकार अधिनियम का पालन करेंगे ।अपने अपने विद्यालय में बच्चों का नामांकन आरटीई के तहत करेंगे ।उन्होंने कहा कि जिले में कुल 197 निजी विद्यालय चल रहे हैं ।जिसमें सिर्फ 18 विद्यालय को मान्यता मिली है। शेष सभी विद्यालय मान्यता के लिए प्रक्रिया में है ।वे अपनी अपनी विद्यालय की मान्यता जल्द ले। डीसी ने कहा कि जिन विद्यालयों की अपनी भूमि है। उन्ही को मान्यता दी जाएगी ।साथ ही विद्यालय पूर्ण रूप से पका की होनी चाहिए ।खपड़ा पोस्ट या एलवेस्टर वाले स्कूल को मान्यता नहीं मिल सकती है। उन्होंने उपस्थित निदेशक को कहा कि निजी विद्यालय अपने अपने स्कूल को अध्ययन केंद्र बनाएं ना कि उसे व्यवसायिक प्रतिष्ठान के रूप में विकसित करे। समाज में विभिन्न प्रकार की जो कुरीतिया जैसे बाल विवाह ,पर्दा प्रथा ,जाति प्रथा आदि के बारे में  बच्चों को जागरुक करें ।उसके बारे में बच्चों को बताएं ।ताकि भविष्य में इन सभी समस्याओं से निजात मिल सके ।उन्होंने कहा कि जिन विद्यालयों को मान्यता लेनी है ।वह फॉर्म भरकर जिला कार्यालय को उपलब्ध कराएंगे। जांच के बाद यदि वह सभी प्रक्रिया को फुल फील करते हैं ।तो उन्हें औपबंधिक स्वीकृति दी जाएगी ।बैठक में जिला शिक्षा अधीक्षक बृज मोहन प्रसाद सहित सभी निजी विद्यालय के निदेशक एवं प्राचार्य  मौजूद थे।

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