गढ़वा:- श्री रामलला मन्दिर में आयोजित श्री रामनवमी महोत्सव के तीसरे दिन आचार्य संजय कृष्ण शास्त्री ने भागवत कथा की महिमा और प्रभाव से जुड़े बालक ध्रुव की कथा सुनाई। सौतेली मां के कारण चार वर्ष की अवस्था मे ध्रुव को घर छोड़ जंगल में जाना पड़ा था। ध्रुव के पास भगवान में भक्ति के अलावा कुछ भी नहीं था। भगवान स्वयं चलकर ध्रुव के पास आये। भगवान ने कुछ भी बोलने-मांगने को कहा। ध्रुव जी चुप रहे। बालक थे। बोलते भी तो क्या। तब भगवान ने उन्हें स्पर्श किया एवं सम्पूर्ण वेद-वेदांत का ज्ञान उन्हें मिल गया। भगवान के आदेश पर ध्रुव जी अपने राजा पिता उत्तानपाद का राजपाट सम्भाला। मां श्रुति को धन्यवाद बोला। कहा कि वे उनसे रुखा व्यवहार कर जंगल नहीं भेजती तो भगवान की भक्ति नहीं मिलती। ध्रुव ने भगवान से अगले जन्म में भी श्रुति को मां के रूप में मंगा। श्री शास्त्री ने कहा कि परमात्मा की कीर्तन करें। उसमे असीम शक्ति है। यह शक्ति भगवान के प्रति भक्ति दिखाकर ही प्राप्त किया जा सकता है। महोत्सव के चौथे दिन श्री कृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाया। देवकी-वासुदेव जी की असीम पीड़ा के बीच अंकुरित हो रहे श्री नारायण की कथा को बड़ी ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। इसी कहानी पर आधारित एक झांकी भी निकाली गई। सोहर, बधाई एवं जन्म से जुड़े कई भजन एवं संगीत प्रस्तुत किया गया। इस दौरान अबीर और फूलों की होली खेली गई। महिला भक्तगणों ने भक्ति भजन पर जी खोलकर नृत्य भी किया। भजन सम्राट धनजी, सुनील शास्त्री, रविन्द्र नाथ तिवारी ने कमाल की प्रस्तुति दी। मौके पर मन्दिर समिति के सचिव धनन्जय सिंह, संरक्षक बैजनाथ सिंह, महेंद्र प्रसाद, सह सचिव सत्यनारायण दुबे, उपाध्यक्ष सुदर्शन सिंह, कोषाध्यक्ष धनन्जय गोंड, कार्यालय मंत्री धनन्जय ठाकुर, जितेंद्र कमलापुरी, संजीव दत्त चौबे, बैजू बाबा सहित सैकड़ों महिला-पुरुष भक्तगण उपस्थित थे।
भगवान की कृपा से चार वर्ष की आयु में ही ध्रुव बन गए थे वेद-वेदांत के ज्ञाता- संजय
प्रकाशित तिथि -
March 22, 2018
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रिपोर्टर -Unknown
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